बरसों से धारूहेड़ा की सड़कों पर बहता वह काला और बदबूदार पानी सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं थी, बल्कि दो राज्यों के बीच कड़वाहट की एक लंबी लकीर बन चुका था। भिवाड़ी की फैक्ट्रियों से निकलने वाला ज़हरीला पानी जब हरियाणा की सीमा में घुसकर खेतों और रास्तों को अपनी चपेट में लेता था तो गुस्सा दिल्ली तक सुनाई देता था। लेकिन अब लगता है कि इस समस्या के दिन गिनती के रह गए हैं। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मेज पर जब हरियाणा और राजस्थान के दिग्गज बैठे, तो समाधान की एक ऐसी तस्वीर निकलकर आई जिसने लाखों लोगों की उम्मीदों को ज़िंदा कर दिया है।
करीब 450 करोड़ रुपये के इस महाप्लान पर मुहर लग चुकी है। यह सिर्फ कागजी वादा नहीं बल्कि ज़मीन पर उतरने वाली वह योजना है जिसमें केंद्र और दोनों राज्य सरकारें कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगी। नितिन गडकरी ने साफ लफ्जों में कह दिया है कि अगर आज इस केमिकल वाले पानी का इलाज नहीं किया गया, तो आने वाली नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी।
